आपके जीवन की इमारत कैसी होगी? यह इस चीज पर निर्भर करती है कि आपकी बुनियाद कैसी है? इसको आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे किसी घर का निर्माण करवाने से पहले उसके नींव पर ध्यान देते है और नींव पर ही निर्भर होता है कि घर कितने मंजिला का होगा? जितनी मजबूत घर की नींव होगी उतनी ही मजबूत और बड़ी इमारत होगी। हमारे जीवन की भी बुनियाद कुछ इसी प्रकार होती है। हमारी बुनियाद पर ही यह निर्भर करता है कि हमारे भविष्य की इमारत कैसी होगी? जब हम अपनी बुनियाद की बात करते हैं तो यह समझ लेना उचित होगा कि बुनियाद किन किन चीजों से मिलकर बनी है या बनती है। हमारे जीवन में अभी तक के जो अनुभव हैं जैसे हमारी सोच, समझ, भावनाएं, चीजों को देखने का नजरिया और उन सब से संबंधित हमारी मान्यताएं कैसी हैं? क्योंकि अभी तक का आपका जीवन जैसा भी है वह इन्हीं सब का परिणाम है।

जब हम यह समझ लेते हैं कि हमारा खुद के प्रति और लोगों के प्रति और चीजों के प्रति व्यवहार कैसा है? जब कोई चुनौती सामने आती है तो हमारा उसके प्रति क्रिया एवं प्रतिक्रिया कैसी होती है? और हम उस समय कैसा महसूस करते हैं और कितनी देर तक उस स्थिति में हम रहते हैं? और उस समय हमारे कैसे निर्णय होते हैं? इन सब पहलुओं को समझ लेने के पश्चात उसमें सुधार करके, एक प्रकार से अपनी आदतों की रिफ्रेमिंग करके, अपने कार्य को और बेहतर कर सकते हैं जिससे हमारा संपूर्ण जीवन सुख समृद्ध और खुशहाल हो सके।
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